Board Results worries – Sacred Programs for Students!

|| We are GEMS ||
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अभी कुछ दिनों में बोर्ड रिजल्ट्स आनेवाले है और आप देखेंगे की मंदिरों, गुरुद्वारों में वृद्धों-वयस्कों के बजाय किशोरों और युवाओं की संख्या कईगुना अचानक ही बढ़ गई | यह इस बात की और इंगित करता है कि हर व्यक्ति जीवन में सफलता की कामना करता है – विशेषतौर पर आज की युवापीढी इस प्रतितोगिता के दौर में सफल होने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है | फिर चाहे वो अपने अच्छे रिजल्ट के लिए मंदिरों में प्रसाद की मन्नत मानना ही क्यूँ न हो| उनके लिए एक कथा प्रसांगिक है –


एक रात अर्जुन आचार्य द्रोण के आश्रम में सभी शिष्यों के साथ भोजन कर रहे थे तभी अकस्मात् तेज हवा के झोंके से दिया बुझ गया| अर्जुन ने  देखा कि अँधेरे में भी उसका हाथ कौर को मुह तक ही ले जाता है | इस घटना से अर्जुन को यह समझ में आया कि निशाना लगाने के लिए प्रकाश से अधिक अभ्यास की आवश्यकता है | इसी समझ के पैदा होते ही उन्होंने रात्री में तीर चलाने का अभ्यास शुरू कर दिया और जल्द ही वे  अन्धकार में भी सटीक निशाना लगाने में प्रवीण हो गए |

जीवन में सफलता का रहस्य है की आप अपनी ऊर्जाओं का उपयोग कैसे करते हैं | परन्तु उससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न है की क्या आप ऊर्जावान हैं? स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषणों में युवाओं के प्रति कई बार इस बात का जिक्र किया है कि शक्तिहीन होना मृत होने के समान है | यह बात बिलकुल सच है पर शक्तिशाली होने का अर्थ क्या है? इस शक्ति का स्रोत क्या है ? यदि यह बात हमें पता भी हो कि शरीर से ज्यादा मन की शक्ति मायने रखती है तो फिर उसे बढ़ाने के क्या उपाय बताये हैं हमारे ऋषियों ने  – यह जानना उससे भी ज्यादा जरूरी है | 

मन की शक्ति को बढ़ाने के लिए भारतीय प्राच्य वैज्ञानिकों, ऋषियों ने मंत्र विज्ञान का आविष्कार किया | मंत्र, ध्वनियों के उस विशेष समूह का नाम है जो किसी प्रयोजन विशेष, कार्यसिद्धि या प्राप्ति के लिए उपयोग में लाया जाता है | पिछले कुछ दशकों में आधुनिक वैगानिकों ने भी इस दिशा में खोज प्रारंभ कर दी है और जहां तक अभी वो पहुँच पाए हैं – इसकी सत्यता से स्तब्ध हैं | यह साबित हो चुका है कि अलग अलग मन्त्र अलग-अलग प्रभाव दिखाते हैं – तनाव, अनिद्रा, आर्थिराइटिस, मानसिक रोग यहाँ तक कि पेड़ पौधों, दूध देनेवाले जानवरों पर भी इनके सफल परीक्षण हो चुके हैं | इसके पीछे एक वैज्ञानिक आधार है – विज्ञान कहता है कि यह सृष्टि ऊर्जा के विभिन्न आवृत्तियों या फ्रीक्वेंसीज़ से पैदा हुई है – अलबर्ट आइन्स्टाइन ने जब यह सिद्ध कर दिया कि पदार्थ यानि मैटर भी ऊर्जा का संघनित रूप है तो अर्थ यह हुआ कि इस संसार में हम जो कुछ भी देखते या महसूस करते हैं वह सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा का ही एक रूप है | इसी सिद्धांत से यह भी इंगित हुआ कि अगर हम ऊर्जा की तरंगों को नियंत्रित कर सकें तो किसी भी स्थिति, वस्तु आदि को नियंत्रित या विस्थापित किया जा सकता है | यही वैज्ञानिक सिद्धांत हिन्दू धर्मग्रन्थ दुर्गा सप्तशती में “या देवी सर्वभूतेषु..”  में सविस्तार वर्णित है | ऊर्जा को हमारे वेद शक्ति या देवी के नाम से संबोधित करते हैं और इसके प्राकट्य को ही शक्ति साधना के रूप में जाना जाता है|

आज जब मंत्रशक्ति यानि की साउंड-पॉवर की वैज्ञानिकता को स्वीकार किया जा रहा है तो फिर इसके उपयोग से युवा वर्ग वंचित क्यूँ रहे और फिर मंत्रो की शक्ति को अनुभव करने के लिए तो आप को सिर्फ अपने शरीर की प्रयोगशाला का उपयोग करना होता है |इस शक्ति का उपयोग करने के लिए,  भारतीय आध्यात्म की एक प्रामाणिक विधा  ‘तत्व शक्ति विज्ञान (TSV)’ जिसे आज दुनिया के कई देशो के लोग अपना चुके हैं, का जिक्र करना मै जरूरी समझता हूँ |  ‘तत्व शक्ति विज्ञान’ विधा हर व्यति के लिए है.. चाहे वो व्यवसायी, नौकरी पेशा, गृहणी, स्पोर्ट्समेन ,संगीतज्ञ, कलाकार, विद्यार्थी आदि कोई भी क्यूँ न हों |  विद्यार्थियों के लिए TSV में विशेष अभ्यास बताये जाते हैं | दीक्षोपरान्त एक संकल्प के साथ साधना शुरू कीजिये – अपने लक्ष्य को निर्धारित अवश्य कर लीजिये फिर इस बात में कोई दो राय नहीं की प्रतिदिन सिर्फ २० मिनटों के अभ्यास से मात्र कुछ दिनों में ही आप अपने जीवन में एक नई ऊर्जा का प्रवाह महसूस करने लगेंगे, आप की बुद्धि प्रखर एवं स्मरंशक्ति में वृद्धि होगी |   सभी वर्गों से सम्बन्ध रखने  यहाँ यह बात स्मरण रखना चाहिए की मंत्र वैसे ही कार्य करते हैं जैसे रासायनिक क्रियाओं में उत्प्रेरक या कैटालिस्ट | इसलिए अपने अध्ययन. अपनी तैयारी या प्रयासों में कोई कमी नहीं करनी चाहिए – अर्जुन की भांति आप भी असंभव को संभव बनाने में समर्थ होंगे |

शिवोहम

– आचार्य अज्ञातदर्शन आनंद नाथ

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